Sunday, September 8, 2019

बिन्नी एवं गौरव जी को
       शुभकामनाएं
बहन आपकी शुभकामनाएं चाहते हैं
आपसे प्रीति भोज मांगना चाहते हैं
       आपके साथ रहना चाहते हैं
       आपके हर्ष में बहना चाहते हैं
ये अनुरोध  अकारण नही है
उन्नति आपकी कुंज डारन रही है
        व्योम विस्तृत फैलता रहा है
        जीवन तारा जलता रहा है
अर्णव सी कीर्ति चतुर्दिक
आशीष सबका रहे हार्दिक
             आपका गौरव मान रहे
            चतुर्दिक सम्मान रहे
आराधना से शेष महेश की
कीर्ति रहे सन्तोष सुरेश की
          जीवन धारा चलती रहे
          तारा डाली फलती रहे
पानी
मैं घर से निकला ,गली में
पानी मे फिसला
मैने टोह में इधर उधर आंख फिराई
हम कर रहे हैं घर की धुलाई
मैं फिर आगे चला, तेज फुहार आयी
मैने इधर उधर देखा,       हम कर रहे
गमलो की सिंचाई
मैं किनारे से बाहर हो गया
सिर पे बौछारों का राज हो गया
मैने इधर उधर आंख फिराई
हम कर रहे छत की धुलाई
लौट वापस घर को आया
पत्नी ने दुखड़ा सुनाया
आज तो बड़ी परेशानी
पानी वाला नही लाया पानी
खाने को लेट हो रहा
मुन्नू भूखे पेट सो रहा
मैने अपने को बहुत दबाया
पर बड़ा क्रोध आया
धीरे बोला क्या पानी वाला नही आया
देखो पानी ने मुझे नहलाया
सब ओर पनियाई पनियाई
घर धुला छत नहाई हुई पौधों की धुलाई
हो गया जल मटियाला
लाये कहाँ से पानी वाला
                    पूनम
हम सब श्रमिक हैं
  प्रेरक पंक्ति --
मई दिवस की याद आयी
सर्वप्रथम  अपने को दी बधाई
(  मेरी बहना  )
मुझे भी मेरी याद आयी
क्या कोई मुझे देगा बधाई
नही
बेटी आएगी कॉलेज से
माँ भूख लगी है बड़े जोर से
माँ जल्दी कुछ बना दो खाऊँगी
अभी आती हूँ पहले नहाउंगी
मैं उसकी सुध लेती हूं
फिर आपसे कुछ कहती हूँ
लेटना चाहा किया स्वयं वादा
हो  न पाया काम था ज्यादा
बेटी मुँह बना बना कर खा रही है
मेरी मेहनत को पलीता लगा रही है
आता होगा बेटा
शरीर से अकड़ा ऐंठा
जब से वो फैक्ट्री गया है
बड़ा हुआ आधा रह गया है
बस की देर सवेर
मेज पर कागजों का ढेर
मालिक का आदेशात्मक स्वर
कुछ गलती न हो जाये रहता डर
शाम हुई चलना अब घर
धड़ धड़ धड़ धड़ भड़ भड़
मैं भूली हूँ एक श्रमिक को
घर के एक महान कार्मिक को
श्रम बिंदु से पूर्ण लथ पथ
घर आएगा झपट झपट झट
वो मेरे बच्चों का पिता है
उसको भी घर की चिंता है
अलग अलग श्रमिक कथा है
सबकी अपनी अपनी व्यथा है
शुभी बेटी को जन्म
दिवस की शुभेच्छा
शुभ शुभ शुभ शुभ शुभी शुभी
प्रेम से भेंटें अभी अभी
मिलती तो हो कभी कभी
घुल मिल जाती तभी तभी
तुम पर प्रेम उमड़ता है
घी बोलो में चुपडता है
प्रेम अमित पापा से है
श्रद्धा भी माता से है
अनुजा से है लगाव बड़ा
पोथी से नि सन्देह बढ़ा
बढ़ो शिक्षा दीक्षा में
साहस भरो परीक्षा में
हम सब करें यही कामना
नैतिकता का हाथ थामना
मेरी बिटिया .......

आया सावन याद आ गयी मुझको बिटिया तेरी 
कैसे भूले बिटिया मुझको मधुर स्मृति तेरी 

फूले नीम ,निबौली फूली
पिछले सावन मेरी बिटिया अंगना झूला झूली

गली -गली घूमी सज धज कर ,सावन के मेले में
झूम -झूम कर समां गयी थी ,सखियों के रेले में

कोयल कुहके नाचे मोर
मन विहग उड़ा बिटिया की ओर

खीचे -भीचे नेह की डोर
पर हमने ही भेजी बिटिया ,लगा प्रयास और जोर

नैनो में है छवि बिटिया की ,पढने गयी गन वेश में
पति निकेतन ठहरी बिटिया ,मन तो होगा देश में

भीगी धरती, भीगा अम्बर ,भीग गया घर - द्वार
भीगे पल -पल , पुलक -पुलक मन, भीगे बारम्बार

आया झोखा याद का ,चहके मन के तार
कैसी होगी बिटिया मेरी , मन पूछे बार -बार

छोड़ अंदेशा ,भेज संदेशा तुरंत बुलाओ बिटिया को
खीर ,पूरी घेवर लाकर कर जिमाओ पति संग बिटिया को 
झीलों की नगरी में देखा -----
झीलों की नगरी में देखानीलकमल है खिला हुआ

भीलों की गगरी में देखा जल मेहनत का मिला हुआ
सडकों की पटरी पर देखा एक नगर है बसा हुआ
सपनों में बचपन को देखा वर्तमान को भुला दिया
चांदी के पलने में देखा माँ ने बचपन सुला दिया
वर्षा में बदली को देखा आसमान को धुला दिया
छोनो को जंगल में देखा बस बचपन को बुला लिया
फूलों को जंगल में देखा बस मुखड़े को खिला दिया
हंसों को पानी में देखा मस्ती का मद पिया हुआ
चांदनी को रजनी में देखा प्यार गाल से छुआ दिया
पंचों उंगली एक मुट्ठ में झोंपड़ा भी किला हुआ
आँख खोल कर जाग को देखा तन मन को कुछ हिला गया
बाल आकांक्षा-------
झिलमिल तारे झिलमिल तारे 
चमके -चमके चंदा प्यारे 
आसमान में रहते सारे 
नहीं आते तुम पास हमारे , 
साथ नही तुम खेलोगे ,
मेरा गुस्सा झेलोगे
दीदी मुझे बताती है ,
जो मैडम उसे पढ़ाती है
दादाजी हैं लगे हुए ,
संग साथी के जुटे हुए
पास तुम्हारे आने को ,
और घमंड मिटने को
दादाजी के साथी कई
पहले भी जाते थे
कभी -कभी वो यान रास्ते में ही खो जाते थे ..
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा ,
दादाजी का कण्ट्रोल होगा
दादाजी के पास है
एक बड़ी सी दूरबीन
दादाजी के साथी देखे
चंदा तारो के सब सीन
मैं पढ़ लिख कर बड़ा बनूँगा
दादाजी की हेल्प करूँगा
नए यंत्र की खोज करूँगा
और एक दिन तुम्हे मिलूँगा